Vice President calls for structural reforms in the agricultural sector to make agriculture profitable and sustainable;

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The Vice President of India, Shri M. Venkaiah Naidu has called for introducing structural reforms in the agricultural sector along with financial assistance schemes like Direct Benefit Transfer to make agriculture profitable and sustainable.

He was addressing the gathering after inaugurating the Mukhya Mantri Krishi Ashirwad Yojna of the Jharkhand Government, in Ranchi, Jharkhand today. Lauding the Jharkhand government for coming up with the scheme, he expressed hope that it would go a long way in addressing agricultural distress in the state.

Under the scheme, all the small and marginal farmers of the state, who have arable land up to a maximum of 5 acres, will be given a grant-in-aid at the rate of Rs. 5000 / – per acre per year, which will also reduce their dependence on loans. This amount would be given in two installments through Direct Benefit Transfer to the beneficiary’s bank account. This is in addition to PM Kisan Nidhi Yojana under which each small & marginal farmer’s family having combined landholding/ ownership of up to two hectares is paid Rs. 6, 000 per year, said the Vice President.

Shri. Naidu opined that Direct Benefit Transfer would eliminate middlemen and ensure that every penny of the financial assistance given by the government reaches the beneficiaries.

The Vice President said that the Government of India had taken a firm resolve to double the income of farmers by 2022. He added that the government was continuously increasing the minimum support price of food grains to achieve this objective.

He asserted that our development would be meaningless until the benefits of progress reached the rural areas and made the lives of our farmers better.

The Vice President also stressed the need for water conservation and said that “Conservation of natural resources like water is essential. For this, a massive campaign of rainwater conservation should be carried out, which will replenish our ground water”.

He cautioned that groundwater levels are continuously falling due to uncontrolled exploitation of groundwater. Due to which the cost of irrigation is increasing. The Vice President also urged the farmers to adopt traditional techniques to support groundwater conservation.

The Governor of Jharkhand, Smt. Draupadi Murmu, the Chief Minister of Jharkhand, Shri Raghuvar Das, the Deputy Chairman of Rajya Sabha, Shri Harivansh Narayan Singh, the Minister of Agriculture, Animal Husbandry and Co-operative Department, Government of Jharkhand, Shri Randhir Kumar Singh and others were present on the occasion.

Following is the text of Vice President’s address in Hindi:

“प्रिय भाईयो एवं बहनो सभी को नमस्कार एवं समस्त झारखंडवासियों को जोहार

प्रदेश के किसान भाइयों के लाभ के लिए मुख्यमंत्री कृषि आर्शीवाद योजना के शुभारंभ के अवसर पर, सावन के इस पवित्र माह में वैद्यनाथ धाम की इस पवित्र भूमि पर, आप सभी के बीच शामिल होकर अत्यंत प्रसन्नता का अनुभव कर रहा हूं। वर्षा ऋतु प्रकृति के नवसर्जन का समय है। जीवनदायी जल से तृप्त हो कर धरती हमे धनधान्य का आर्शीवाद देती है। इस अवसर पर आप सभी धरा-सेवी किसान भाइयों के बीच आकर धन्य महसूस कर रहा हूं।

मित्रों,

झारखंड कृषि प्रधान राज्य है। मुझे यह जानकर खुशी है कि झारखंड सरकार द्वारा किसानों के कल्याण एवं कृषि को बढ़ावा देने की दिशा में गंभीर प्रयास किये जा रहे हैं। मुझे बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा कृषि को बढ़ावा देने हेतु जल संग्रहण एवं जल संचयन की योजना चलायी जा रही है, तालाब का जीर्णोद्धार, डीप बोरिंग एवं परकोलेशन टैंक का निर्माण किया रहा है, जिससे बढ़े क्षेत्रफल में अतिरिक्त सिंचाई सृजित हो सकेगी।

मित्रों, मैं आग्रह करूंगा कि जल जैसे प्राकृतिक संसाधन का संचयन, संरक्षण आवश्यक है। इसके लिए वर्षा जल संरक्षण का व्यापक अभियान चलाया जाना चाहिए, जिससे धरती का जल स्तर बढ़े। यह चिंता का विषय है कि भूजल के अनियंत्रित दोहन से भूजल का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है। जिससे सिंचाई की लागत बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने per drop, more crop का संदेश दिया है। मैं अपेक्षा करूंगा कि हमारे कृषक भाई अपने पारंपरिक तकनीक अपना कर भूजल संरक्षण में सहयोग देंगे।

मुझे जानकर हर्ष है कि कृषि के यांत्रिकीकरण का कार्य भी हो रहा है। उन्नत बीज उपलब्ध कराने हेतु सरकार द्वारा बीज ग्राम का गठन सराहनीय पहल है। मुझे यह जानकर संतोष है कि कृषकों को योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके इसके लिए सिंगल विंडो सेंटर की व्यवस्था की गयी है। कृषि अनिश्चितताओं से भरा क्षेत्र है। अत: विपरीत परिस्थितियों में फसल की क्षति की भरपाई हेतु फसल बीमा योजना भी चलाई जा रही है। साथ ही किसानों की लागत कम करने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को दिये जा रहे अल्पकालीन कृषि ऋण पर अतिरिक्त 3 प्रतिशत ब्याज माफ करने हेतु इंट्रेस्ट सबवेंशन की योजना भी चलाई जा रही है। राज्य सरकार की ये योजनाऐं स्वागत योग्य हैं।

आप जानते ही हैं कि भारत सरकार द्वारा किसानों की आय को 2022 तक दोगुना करने का संकल्प लिया गया है। इसी क्रम में सरकार 23 अनाजो के न्यूनतम समर्थन मूल्य को लगातार बढ़ा रही है। हमारे वनवासी भाइयों के लिये वन उत्पादों पर भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय किया जा रहा है।

मुझे खुशी है कि किसानों की आमदनी बढ़ाने के संकल्प को पूरा करने के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कृषि आर्शीवाद योजना का आज शुभारंभ किया जा रहा है।

इस योजना में राज्य के सभी लघु एवं सीमांत किसान जिनके पास अधिकतम 5 एकड़ तक कृषि योग्य जमीन होगी उन्हें 5000/- रूपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष की दर से सहायता अनुदान दिया जायेगा। जिन किसानों के पास कुल कृषि योग्य भूमि 0-1 एकड़ तक होगी, उन्हें 5000/- रूपये आर्थिक सहायता के रूप में दिये जायेंगे। मुझे विश्वास है कि इस राशि का उपयोग किसानों द्वारा कृषि कार्य हेतु किया जायेगा, जिससे उनके ऋण पर निर्भरता में भी कमी आयेगी। मुझे यह भी बताया गया है कि यह राशि दो किस्तों में दी जायेगी। इस योजना से सभी योग्य किसानों को प्रति वर्ष कम से कम 5000/- रूपये तथा अधिकतम 25000/- रूपये मिलेंगे और यह राशि किसानों को DBT के माध्यम से सीधा उनके बैंक खाते में भेजी जायेगी।

मित्रों,

विगत दशकों में देश में कृषि योग्य भू क्षेत्र में तो वृद्धि हुई है लेकिन यह चिंता का विषय है कि Holdings का आकार कम हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार आगामी कुछ वर्षों में लगभग 90% Holdings 1 हैक्टेयर से कम क्षेत्रफल की होगी। आज कृषि पर आधारित लगभग 6.25 करोड़ परिवार 1 हैक्टेयर से कम की Holdings पर जिदंगी बसर कर रहे हैं। Holdings के आकार के साथ, ऐसे परिवारों की आमदनी भी कम होती है। लेकिन छोटी Holdings से ही अधिकतम पैदावार प्राप्त करने के लिए, किसानों द्वारा प्रयोग किये गये बीजों, खाद और रसायनों से लागत बढ़ती जाती है। इसी कारण अन्य देशों के मुकाबले हमारे देश में प्रति हैक्टेयर उत्पादकता भी कम है। ऐसे में सरकार द्वारा दी गयी यह सहायता सर्वथा स्वागत योग्य है।

मुझे हर्ष है कि राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष राज्य के लगभग 35 लाख किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। जिसके प्रथम चरण में आज लगभग 10 लाख किसानों के बीच प्रथम किस्त के रूप में राशि 380.00 करोड़ रूपये का वितरण किया जा रहा है। मुझे विश्वास है कि यह योजना किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में सहायक साबित होगी।

मैं पुन: राज्य सरकार को इस योजना की शुरुआत करने के लिए बधाई देता हूं तथा सभी किसानों को शुभकामना देता हूं। इस अवसर पर मैं किसान बंधुओं से आग्रह करूंगा कि कृषि आधारित सूक्ष्म उद्यम या शिल्प या अन्य ग्रामीण उद्योगों को भी लगाएं, इससे न केवल आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण उद्यमिता बढ़ेगी बल्कि कृषि उत्पादकता भी बढ़ेगी। आपके विकास से ही राज्य का विकास संभव है।

मैं पुन: इस योजना को शुरु करने हेतु राज्य सरकार को बधाई देता हूं।

जय हिंद।”